- महाकाल मंदिर का नंदी हॉल बदलेगा रूप, 20 लाख की लागत से होगा सौंदर्यीकरण; सावन से पहले पूरा करने की तैयारी
- महाकाल मंदिर में भस्म आरती के नाम पर फिर ठगी, गुजरात की दो महिलाओं से 42 हजार रुपए वसूले; पुलिस ने शुरू की जांच
- शनिचरी अमावस्या पर उज्जैन के शनि मंदिर में उमड़ा आस्था का सैलाब, 24 घंटे में 1000 लीटर से ज्यादा तेल चढ़ा; घाटों से हटाए गए कपड़े और जूते-चप्पल
- “मैं पापा के साथ जाऊंगा…”: उज्जैन कोर्ट में मासूम की जिद के बाद पिता संग भैरवगढ़ जेल पहुंचा 4 साल का बच्चा
- बाबा महाकाल के दरबार में पहुंची भारतीय महिला क्रिकेट टीम, कप्तान हरमनप्रीत कौर समेत खिलाड़ियों ने भस्म आरती में लिया आशीर्वाद
झोलाछाप क्लीनिकों को नोटिस, बावजूद इलाज किया तो होंगे सील
उज्जैन | झोलाछाप व फर्जी डॉक्टर्स के खिलाफ अब कार्रवाई तेज होगी। जिन्हें क्लीनिक बंद करने के नोटिस जारी किए थे, उनके द्वारा चिकित्सकीय कार्य किया जाता है तो उनके क्लीनिक सील करने की कार्रवाई होगी। वहीं अपनी पैथी के अलावा दूसरी पैथी में इलाज करने वालों पर एफआईआर दर्ज करवाई जाएगी व जुर्माना होगा। जो कि 5 हजार से 50 हजार तक हो सकता है। सीएमएचओ डॉ.वीके गुप्ता ने बताया नोटिस के बाद भी यदि क्लीनिक चालू पाए गए तो उन्हें सील किया जाएगा। इसके लिए सर्चिंग दल बनाया जाएगा जो कि मौके पर जाकर देखेगा। उनकी रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। ब्लॉक में कार्रवाई के लिए बीएमओ को अधिकृत किया है। उनसे अब तक हुई कार्रवाई की रिपोर्ट मांगी है। सीएमएचओ की ओर से डॉ. पीएन चौबे, डॉ. मोहन मालवीय, डॉ. ओपी भाटी, डॉ. मंजू शर्मा सहित अन्य को क्लीनिक बंद करने के नोटिस जारी किए थे। इधर वैकल्पिक चिकित्सा संघ भी झोलाछाप व फर्जी डॉक्टर्स के खिलाफ हो रही कार्रवाई के पक्ष में है। संघ के प्रांतीय उपाध्यक्ष अकिल खान ने बताया कि बगैर मान्यता व बिना पात्रता के संचालित क्लीनिक बंद होना चाहिए।
तीन माह तक का कठोर कारावास हो सकता
मप्र उपचर्यागृह तथा रूजोपचार संबंधी स्थापनाएं अधिनियम 1973 की धारा- 3 का उल्लंघन करने पर अधिनियम-1973 की धारा-8 (क) (एक) तथा (दो) के अंतर्गत जुर्माने तथा तीन माह तक के कठोर कारावास का प्रावधान है।
ये चिकित्सा पद्धति मान्य
एलोपैथी चिकित्सा पद्धति- इसमें वे ही चिकित्सा व्यवसाय हेतु पात्र हैं जो मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया एक्ट में उल्लेखित अर्हताधारी होकर मप्र मेडिकल काउंसिल एक्ट 1987 अंतर्गत पंजीकृत हो।
इलेक्ट्रोहोम्योपैथी/ आल्टर्नेटिव मेडिसिन- इन पद्धतियों के चिकित्सा व्यावासियों के लिए उच्च न्यायालय पश्चिम बंगाल, मप्र व नई दिल्ली द्वारा इनके विरुद्ध कोई कार्रवाई न करने संबंधी निर्देश हैं।
भारतीय चिकित्सा पद्धति- आयुर्वेद, यूनानी तथा प्राकृतिक चिकित्सा व्यवसायी अधिनियम 1970 के अंतर्गत मान्य अर्हता धारी का बोर्ड ऑफ आयुर्वेदिक एंड यूनानी सिस्टम ऑफ मेडिसिन एंड नेचुरोपैथी, मप्र के अंतर्गत पंजीयन अनिवार्य है।
होम्योपैथी एंड बाॅयोकेमिकल सिस्टम्स ऑफ मेडिसिन- चिकित्सा व्यवसाय के लिए होम्योपैथी सेंट्रल काउंसिल एक्ट 1973 की दूसरी/ तीसरी अनुसूची में मान्य अर्हताधारी का स्टेट काउंसिल ऑफ होम्योपैथी मप्र के अंतर्गत पंजीयन अनिवार्य है।